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HINDI POETRY: चलो आज मौन संवाद करते हैं - संदीपिका दीक्षित

  • वीरेंद्र सक्सेना
  • 1 अक्तू॰ 2022
  • 1 मिनट पठन

HINDI POETRY: लखीमपुर खीरी के चमकते सितारों में एक नाम है संदीपिका दीक्षित। लखनऊ निवासी संदीपिका का जन्म लखीमपुर खीरी में हुआ। पेशे से ग्रहणी संदीपिका २ वर्षो से साहित्य रचना में अपना योगदान दे रही हैं और इनके २ निम्नलिखित साझा संग्रह प्रकाशित भी हो चुके है।


1- सर्वश्रेष्ठ रचनाएँ,मेरे शब्द मेरी पहचान


2-रुद्रप्रिया The Consort of Shiva


उनके द्वारा रचित एक उत्कृष्ट रचना है मौन संवाद :






मौन संवाद

लो आज मौन संवाद करते हैं ।

आँखो से हल हर विवाद करते हैं ।।


शब्द हैं व्याकुल अधरों पर थिरकने के लिए,

मचल रहे हैं एक कहानी को कहने के लिए,

मौन रहकर शब्दों को स्तब्ध करते हैं,

इस कथानक का मौन विस्तार करते हैं ।।

नैनों से हल हर विवाद करते हैं .....


सूने हैं मन के घाट मौन का है हाहाकार ,

मौन की देहरी पर बिखरे हैं शब्द हजार,

गुनगुने आंसुओं से प्रेम का आचमन करते हैं,

मनोभावों का आँखो से सम्बन्ध करते हैं ।।

नैनों से हल हर विवाद करते हैं ......


मौन होकर मेरे मौन के साथी बने हो ,

मेरे सभी प्रश्नों का तुम मौन उत्तर बने हो ,

इस निरंतर मौन से अब ,

आओ चिरंतर निनाद करते हैं ।।

नैनों से हल हर विवाद करते हैं ......


मौन से रिश्ता मजबूर रहेगा सदा ,

रेत के जैसे हाथों से रिसता रहेगा सदा,

खण्डहर हो रहे रिश्ते का ,

आओ पुनः निर्माण करते हैं ।।

नैनों से हल हर विवाद करते हैं ...


चलो आज मौन संवाद करते हैं ।

नैनों से हल हर विवाद करते हैं ।।


स्वरचित ✍
"शब्दों के मोती "
संदीपिका दीक्षित

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